कश्मीरी अलगावादियों से बात चीत करने की नीति को नुकसान पहुंचाएगा।

भारत की रक्षा करने वाले जवान की आतंकवादी द्वारा मौत हो और उसका पार्थिव शरीर उसके गांव अंतिम संस्कार के लिए आरहा हो, तब क्या कोई राजनैतिक दल, नीचता कर सकता है? मैं सोचता था कि यही एक क्षण है जब लोग राजनीति से ऊपर उठ कर, देश की रक्षा में बलिदान हुए जवान को कृतज्ञता से श्रद्धांजलि देंगे और जनता को देने देंगे।

लेकिन कांग्रेस एक ऐसा दल है जो अपवाद स्वरूप है। अभी फोन पर पता चला इस गमगीन माहौल में भी कांग्रेसी अपनी नीचता दिखाने से बाज नही आये हैं। अभी फोन पर राजस्थान से सूचना मिली है कि वहां के जिला राजसमंद के बिनोल ग्राम के निवासी नारायण लाल गुर्जर, पुलवामा हमले में वीरगति को प्राप्त हुये है । उनके पार्थिव शरीर को आज उनके गांव पहुंचना था, जिसकी सूचना जब शहर में मिली तो प्रातः से ही पूरे राजसमंद शहर की जनता अपने अपने व्यापारिक प्रतिष्ठान, दुकान, शोरूम, स्कूल व आफिस बंद कर के अंतिम दर्शन करने के लिए सड़कों पर आगयी थी। इस भीड़ में शहर के बच्चे व महिलाएं भी हाथ मे फूल मालाएं व तिरंगा ले कर आंसू भरी आंखों से देश के इस सपूत की राह तक रही थी।

स्थानीय प्रशासन से जैसे ही राजस्थान की कांग्रेसी सरकार के मुख्यमंत्री गहलोत को यह पता चला कि पूरा शहर अंतिम दर्शन के लिए सड़क पर है, उन्होंने आदेश दिया कि ज्यादा लोगो को अंतिम संस्कार में जाने से रोका जाए। उनका ख्याल था कि पार्थिव शरीर को देख कर लोगो को संवेदनाये कांग्रेस के विरुद्ध भड़केगी और यह कांग्रेस की पाकिस्तान व कश्मीरी अलगावादियों से बात चीत करने की नीति को नुकसान पहुंचाएगा।

इसका परिणाम यह हुआ कि एक तरफ शहर आंखे बिछाए अपने लाल का इंतजार करता रहा और दूसरी तरफ प्रशासन ने अंतिम मौके पर, बिना किसी सूचना के अंतिम यात्रा का मार्ग बदल दिया। स्वर्गीय नारायण लाल गुर्जर के पार्थिव शरीर को शहर से बायपास से सीधे उनके गांव की ओर मोड़ दिया जो शहर से लगभग 12 किमी दूर था। जब अंतिम दर्शनों के लिए खड़ी लाखो की जनता को यह बात देर से पता चली तो दुख में डूबी जनता का सब्र टूट गया। वे लोग सुबह से वीरगति को प्राप्त अपने राजसमंद के सपूत का इंतज़ार कर रहे थे और राजस्थान की कांग्रेसी सरकार ने गुपचुप तरीके से पार्थिव शव को गांव पहुंचा दिया।

कांग्रेस से अपनी हीनता और कमीनता को जो परिचय दिया, उसकी धता बताते हुए पूरे राजसमंद की आक्रोशित जनता, अंतिम दर्शन करने के लिए पैदल ही बिनोल गांव की ओर कुछ कर गयी। इसका परिणाम यह हुआ कि एक बलदानी के अंतिम संस्कार पर श्रद्धांजलि देने पूरा शहर बीनोल गांव में समाहित हो गया।

राजसमंद में हुई घटना और उसकी प्रतिक्रिया में जनता का पैदल ही गांव कुंच कर जाना बहुत कुछ कह जाता है। यह जनता है, जो सब जानने लगी है। यदि कांग्रेस की सरकारें बलिदानियों के अंतिम संस्कार पर यह सोच कर राजनैतिक दिमाग लगा रही है कि जनता का आक्रोश पाकिस्तान व कश्मीरी आतंकवादियों के विरुद्ध नही भड़के और जनता की संवेदनाओं को, वोट के नुकसान के तराजू पर तौलेंगे तो यह कांग्रेस की गलतफहमी है कि इससे कांग्रेस के पाप छिप जाएंगे। आज आज भारत का बच्चा बच्चा यह जान गया है कि कांग्रेस का हाथ आतंकवादियों के साथ है और उनके हाथ भारत की सुरक्षा में लगे लोगो के बहे खून से सने हुये है।

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