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स्मृति शेषः हर दल में दोस्त, सत्ता गलियारों में रही मजबूत पकड़

राज्यसभा सदस्य अमर सिंह का सिंगापुर में उपचार के दौरान शनिवार को निधन हो गया। वह 64 साल के थे। उनका 2011 में गुर्दा प्रत्या रोपण हुआ था और वह लंबे समय से बीमारी से जूझ रहे थे। अपने निधन से महज तीन घंटे पहले पूर्व समाजवादी नेता सिंह ने ट्विटर पर संदेश लिखकर बाल गंगाधर तिलक की सौवीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि दी थी और एक अन्य संदेश में देशवासियों को ईद की बधाई दी थी।

अमर सिंह को 90 के दशक से लेकर 2010 तक देश में सत्ता के गलियारों में अपनी मजबूत पकड़ के लिए जाना जाता था। हर राजनीतिक दल में उनके दोस्त थे। सियासत से लेकर बॉलीवुड और उद्योग जगत की हस्तियों के बीच उनकी तूती बोलती थी। मनमोहन सिंह की अगुआई वाली केंद्र की यूपीए-1 सरकार के लिए वह संकटमोचक रहे थे। 2008 में अमेरिका के साथ परमाणु करार के मुद्दे पर वाममोर्चा ने यूपीए-1 सरकार से समर्थन वापस ले लिया था, तब अमर सिंह ने ही समाजवादी पार्टी का समर्थन सुनिश्चित कर सरकार गिरने से बचाया था।

समाजवादी पार्टी में उनका रुतबा मुलायम सिंह के बाद दूसरे नंबर के नेता का था। एक वक्त ऐसा भी आया कि 2010 में उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। इसके बाद राजनीतिक घटनाक्रम तेजी से बदले और कभी भाजपा के कट्टर आलोचक रहे अमर सिंह पांच जुलाई 2016 में उसी के समर्थन से राज्यसभा पहुंचे। अमर सिंह भाजपा के कार्यक्रमों में नजर आने लगे। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े एक संगठन को अपने पूरी संपत्ति दान करने का भी एलान किया था। समाजवादी पार्टी से अलग होने के बाद उनकी राजनीतिक सक्रियता कम हो गई थी। हालांकि, बीमार होने से पहले तक उनकी करीबी भारतीय जनता पार्टी के साथ बढ़ गई थी।

उनके राजनीतिक सफर की शुरुआत 1996 में राज्यसभा का सदस्य चुने जाने के साथ ही हुई थी। वह 2002 और 2008 में भी राज्यसभा के लिए चुने गए। मुलायम सिंह यादव के संपर्क में अमर सिंह 90 के दशक में आए थे। साल 1996 में अमर सिंह और मुलायम सिंह एक विमान यात्रा में मिले थे। उस यात्रा के बाद अमर और मुलायम की नजदीकियां बढ़ी थीं। अमर सिंह की सुब्रत राय सहारा और अनिल अंबानी से भी गहरी दोस्ती रही। बड़े उद्योगपति और पूर्वांचल के रसूखदार ठाकुर नेता के रूप में पहचाने जाने वाले अमर सिंह कुछ साल में मुलायम सिंह के खास बन गए।

फिल्म अभिनेता अमिताभ बच्चन के परिवार से भी अमर सिंह के बेहद करीबी रिश्ते रहे। हालांकि, पिछले कुछ साल में इन रिश्तों में खटास जरूर आई थी। 90 के दशक में अमिताभ बच्चन अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहे थे। एक के बाद एक फ्लॉप फिल्मों और अपनी कंपनी एबीसीएल के डूबने के चलते उन्हें लगातार आयकर विभाग के नोटिस मिल रहे थे। उस वक्त महज 4 करोड़ रुपए न चुका पाने के चलते उनके बंगले के बिकने और उनके दिवालिया होने की नौबत तक आ गई थी। तब अमर सिंह ने दोस्ती का हाथ बढ़ाया और अमिताभ बच्चन को कर्जे से उबारा। फिर यह दोस्ती लंबी चली और बॉलीवुड से लेकर राजनीतिक गलियारों तक में चर्चा का विषय रही। अमिताभ की पत्नी और चर्चित अभिनेत्री रहीं जया बच्चन और अभिनेत्री जया प्रदा को अमर सिंह की पहल पर सपा में शामिल किया गया और सांसद बनने का मौका मिला।

विभिन्न दलों के नेताओं ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने शनिवार को राज्यसभा सदस्य और पूर्व सपा नेता अमर सिंह के निधन पर शोक प्रकट करते हुए कहा कि उनके सभी दलों में मित्र थे और वह कुशल राजनेता थे। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अमर सिंह के निधन पर शोक प्रकट करते हुए उन्हें बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी और एक प्रतिभाशाली सांसद बताया। उप राष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने सिंह के परिवार और उनसे जुड़े रहे लोगों के प्रति अपनी संवेदनाएं प्रेषित कीं और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए भगवान से प्रार्थना की।

अमर सिंह को श्रद्धांजलि देते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि वह विनोदपूर्ण स्वभाव के ऊर्जावान नेता थे और उनके सभी राजनीतिक दलों में दोस्त थे। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा कि वे सामाजिक स्वभाव वाले कुशल राजनेता और रणनीतिकार थे।

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अमर सिंह की अपने पिता मुलायम सिंह यादव के साथ एक तस्वीर साझा करते हुए दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि दी। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल ने कहा कि अमर सिंह को हमेशा मूल्यवान सहयोगी और शानदान इंसान के रूप में याद रखा जाएगा।

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने ट्वीट किया, ‘अमर सिंह जी के परिवार के प्रति गहरी संवेदनाएं। मैं दुख के इस क्षण में उनकी शोकाकुल पत्नी और बेटियों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करती हूं।’ सपा में अमर सिंह के साथ रहे राज बब्बर ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि परमात्मा उनकी आत्मा को शांति दे और परिवार को इस अपूरणीय क्षति को सहने की शक्ति प्रदान करे।

‘अमर सिंह जी ऊर्जावान सार्वजनिक शख्सियत थे। पिछले कुछ दशकों में उन्होंने कुछ बड़े राजनीतिक घटनाक्रमों को करीब से देखा था। वह अनेक वर्गों के लोगों से अपनी मित्रता के लिए भी जाने जाते थे। उनके निधन से दुखी हूं।’
– प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

अमर सिंह (27 जनवरी 1956- 1 अगस्त 2020)

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